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शनिवार, 11 अप्रैल 2015

साइबर सिक्योरिटी- CYBER SECURITY

साइबर सिक्योरिटी


कंप्यूटर और इंटरनेट पर तेजी से बढ़ती हमारी निर्भरता से वर्चुअल वर्ल्ड से जुड़े अपराधों में भी बेतहाशा वृद्धि हुई है। ऐसे में साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स की जरूरत काफी बढ़ गई है।

भले ही इंटरनेट ने हमें तमाम सुविधाएं दी हों, पर इस कारण साइबर क्राइम भी विभिन्न रूपों में हमारे सामने आया है। आजकल अक्सर हमें वेबसाइट हैकिंग, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, साइबर बुलिंग, क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, पोर्नोग्राफी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी भी अहम चुनौती बनती जा रही है। आतंकवादियों द्वारा इंटरनेट का इस्तेमाल शुरू कर देने से साइबर टेररिज्म को भी काफी बढ़ावा मिला है। ऐसे में साइबर क्राइम के विभिन्न रूपों का सामना करने तथा उनको रोकने के लिए जागरूकता भी काफी बढ़ी है और इसी का नतीजा है कि साइबर सिक्योरिटी आज कैरियर के रूप में हमारे सामने मौजूद है।

कार्य का स्वरूप
हैकिंग कंप्यूटर यूजर्स की परेशानी का मुख्य कारण है, जिसके जरिए अपराधी गोपनीय सूचनाओं को हैक कर सकता है, जैसे पासवर्ड, के्रडिट कार्ड नंबर और पिन कोड, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड आदि। हैकिंग से संबंधित समस्याओं को सुलझाने के लिए एथिकल हैकिंग प्रोग्राम की मदद ली जाती है। किसी साइबर क्राइम के बाद यह पता लगाना कि उससे संबंधित ई-मेल कहां से भेजा गया, किस आईपी एड्रेस का उपयोग किया गया आदि कार्य साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट के ही जिम्मे होते हैं। इंटरनेट से संबंधित विभिन्न अपराधों को हैंडल करने के लिए साइबर लॉ का भी इस्तेमाल किया जाता है। साइबर एक्सपर्ट की नजर साइबर क्राइम की चुनौतियों पर भी होती है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

कैसे-कैसे कोर्स
साइबर सिक्योरिटी से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं की ट्रेनिंग देने के लिए कई तरह के कोर्स उपलब्ध हैं। ये कोर्स शॉर्ट टर्म और लांग टर्म दोनों तरह के होते हैं। इसके तहत सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, एडवांस डिप्लोमा और बैचलर स्तर तक के पाठ्यक्रम हैं। इन पाठ्यक्रमों को आप अपनी सुविधानुसार रेगुलर, डिस्टेंस या ऑनलाइन, किसी भी मोड से चुन सकते हैं। साइबर सिक्योरिटी से संबंधित पाठ्यक्रमों में साइबर सिक्योरिटी की चुनौतियां, उनसे बचने के उपाय, साइबर क्राइम और जांच की विधि, रोकथाम के उपाय, साइबर लॉ, ऑनलाइन डाटा सिक्योरिटी, ऑनलाइन फाइनेंशियल फ्रॉड आदि के बारे में विस्तार से बताया जाता है।

शैक्षणिक योग्यता
कंप्यूटर और आईटी से संबद्ध होने के बावजूद साइबर सिक्योरिटी से संबंधित पाठ्यक्रमों में एडमिशन लेने के लिए यह जरूरी नहीं है कि आपके पास कंप्यूटर/आईटी में उच्च डिग्री हो। साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स, किसी भी स्ट्रीम के विद्यार्थी इस क्षेत्र में कैरियर बना सकते हैं, पर इसके लिए कंप्यूटर की बेहतर जानकारी जरूरी है। चूंकि इस कैरियर का मुख्य आधार आईटी है, इसलिए ऐसे कोर्स आईटी प्रोफेशनल्स के कैरियर को एक नई दिशा दे सकते हैं। साइबर सिक्योरिटी से संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं है, जबकि कुछ कोर्स ग्रेजुएशन के बाद ही किए जा सकते हैं। लॉ, आईटी, पुलिस, सुरक्षा विभाग आदि में कार्यरत व्यक्ति भी इन कोर्सेज के लिए आवेदन कर सकते हैं।

मुख्य संस्थान
साइबर सिक्योरिटी से संबंधित उच्च स्तर के कोर्स फिलहाल गिने-चुने संस्थानों में ही उपलब्ध हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद द्वारा साइबर लॉ ऐंड इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी में मास्टर डिग्री का कोर्स कराया जाता है। इसके लिए बीई/बीटेक जरूरी है। एडमिशन एंट्रेंस टेस्ट के आधार पर होता है। इसके अतिरिक्त इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट, दिल्ली द्वारा भी साइबर लॉ में पीजी डिप्लोमा करवाया जाता है, जिसके लिए योग्यता किसी भी विषय में ग्रेजुएशन है। ई-काउंसिल सर्टिफाइड एथिकल हैकर और स्कूल ऑफ एथिकल हैकिंग, हैदराबाद में भी कई पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। साइबर सिक्योरिटी से संबंधित सेमिनार और वर्कशॉप भी समय-समय पर आयोजित होते रहते हैं। इन वर्कशॉप और सेमिनार की जानकारी आप गूगल सर्च से ले सकते हैं। पर विजिट कर आपको कई वर्कशॉप्स की जानकारी मिल जाएगी।

सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) द्वारा भी साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल तैयार करने के उद्देश्य से साइबर सिक्योरिटी में सर्टिफिकेट कोर्स करवाया जाता है। कोई भी डिग्री या डिप्लोमा धारी इस सर्टिफिकेशन को कर सकता है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन साल में दो बार होता है। विशेष जानकारी के लिए आप पर विजिट कर सकते हैं। इसके बाद आप सी-डैक सर्टिफाइड साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल के रूप में काम कर सकते हैं।

रोजगार की संभावनाएं
आईटी इंडस्ट्री, ई-बिजनेस, ई-टिकटिंग, ई-गवर्नेंस, ई-कॉमर्स आदि से संबंधित जितने भी क्षेत्र हैं, उन सभी जगहों पर इस फील्ड के प्रोफेशनल्स की मांग बनी रहती है। कोर्स के बाद विभिन्न आईटी कंपनियों में रोजगार के मौके मिलते हैं, जहां साइबर एक्सपर्ट एवं कंसल्टेंट के रूप में उन्हें मौका मिलता है। बैंकों में भी नियुक्ति होती है। ई-कॉमर्स तथा फाइनेंशियल संस्थानों में ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने तथा हैंडल करने के लिए इन प्रोफेशनल्स की मांग होती है। साइबर लॉ एवं सिक्योरिटी से संबंधित ट्रेनिंग सेंटरों में ट्रेनर के रूप में भी काम किया जा सकता है। पुलिस विभाग एवं सुरक्षा एजेंसियों में साइबर क्राइम एक्सपर्ट के रूप में जरूरत बनी रहती है। फॉरेंसिक फील्ड में भी साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स की मांग होने लगी है। लॉ फर्म्स में लीगल एक्सपर्ट (साइबर) की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा साइबर लॉ कंसल्टेंसी के रूप में इसमें स्वरोजगार के भी मौके हैं। ई-गवर्नेंस के पूरी तरह अस्तित्व में आने के बाद विभिन्न सरकारी विभागों में ऐसे प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार के काफी मौके उपलब्ध होंगे।

साइबर सिक्योरिटी से संबंधित कुछ अन्य संस्थान हैं :
इग्नू, नई दिल्ली
एमिटी लॉ स्कूल, नोएडा
दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली
एशियन स्कूल ऑफ साइबर लॉ, पुणे
इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी, मुंबई
आईएमटी, सेंटर फॉर डिस्टेंस लर्निंग, गाजियाबाद
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मूंगफली तथा चना-

मूंगफली तथा चना

मूंगफली में छुपा सेहत का राज

मूंगफली सेहत का खजाना है. साथ ही यह वानस्पतिक प्रोटीन का एक सस्ता स्रोत भी है. इसमें प्रोटीन की मात्रा मांसाहार की तुलना में कई गुना अधिक होती है. १०० ग्राम कधी मूंगफली में १ लीटर दूध के बराबर प्रोटीन होता है.मूंगफली में प्रोटीन की मात्रा २५ प्रतिशत से भी अधिक होती है. साथ ही मूंगफली पाचन शक्ति बढाने में भी कारगर है. २५० ग्राम भूनी मूंगफली में जितनी मात्रा में खनिज और विटामिन पाये जाते हैं, वो २५० ग्राम मांस से भी प्राप्त नहीं हो सकता है. मूंगफली में न्यूट्रियंटस, मिनरल, एंटी-ऑक्सीडेंट और विटामिन जैसे पदार्थ पाये जाते हैं, जो कि स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभप्रद साबित होता है. इसमें मोनो इनसैचुरेटेड फैटी एसिड पाये जाते हैं, जो कि एलडीएल या खराब कोलस्ट्रॉल को कम कर के अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढाते हैं. मूंगफली में प्रोटीन, चिकनाई और शर्करा पायी जाती है. एक अंडे के मूल्य के बराबर मूंगफलियों में जितनी प्रोटीन व ऊष्मा होती है, उतनी दूध व अंडे से संयुक्त रूप में भी नहीं होती. इसकी प्रोटीन दूध से मिलती-जुलती है,चिकनाई घी से मिलती है. मूंगफली के खाने से दूध, बादाम और घी की पूर्ति हो जाती है. एक स्टडी के मुताबिक, जिन लोगों के रक्त में ट्राइग्लाइसेराइड का लेवल अधिक होता है, वे अगर मूंगफली खायें, तो उनके ब्लड के लिपिड लेवल में ट्राइग्लाइसेराइड का लेवल १०.२ फीसदी कम हो जाता है. अगर आप सर्दी के मौसम में मूंगफली खाएंगे तो आपका शरीर गर्म रहेगा. यह खांसी में उपयोगी है व फेफडे को बल देती है. भोजन के बाद यदि ५० या १०० ग्राम मूंगफली प्रतिदिन खायी जाये, तो सेहत बनती है, भोजन पचता है, शरीर में खून की कमी पूरी होती है और मोटापा बढता है. इसे भोजन के साथ सब्जी, खीर, खिचडी आदि में डालकर नित्य खाना चाहिए. मूंगफली में तेल का अंश होने से यह वायु की बीमारियों को भी नष्ट करती है. मुट्ठी भर भुनी मूंगफलियां निश्चय ही पोषक तत्वों की दृष्टि से लाभकारी हैं. मूंगफली में प्रोटीन, केलोरिज और विटामिन के, इ, तथा बी होते हैं, ये अच्छा पोषण प्रदान करते हैं. मूंगफली पाचन शक्ति को बढाती है, रुचिकर होती है, लेकिन गरम प्रकृति के व्यक्तियों को हानिकारक भी है. मूंगफली ज्यादा खाने से पित्त बढता है.

चने में छिपा है सेहत और सुंदरता का राज


आयुर्वेद में यह कहा जाता है कि अगर आप फुर्तीले बने रहना चाहते हैं तो चने का सेवन नियमित रूप से करना शुरू कर दीजिये। बस एक मुट्ठी चना से आप स्वस्थ और ताकतवर बने रह सकते हैं। 
चना बहुत पौष्टिक होता है। चना चाहे भूना हुआ हो या अंकुरित किया हुआ, इसे खाना शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। चने में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नमी, चिकनाई, रेशे, कैल्शियम, आयरन और विटामिन्स पाए जाते हैं।
चना आपको सुंदर और तेज दिमाग वाला बनाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नमी, चिकनाई, रेशे,कैल्शियम, आयरन और विटामिन्स पाए जाते हैं। खून की कमी, कब्ज, डायबिटिज और पीलिया जैसे रोगों में चने का प्रयोग लाभकारी होता है। बालों और त्वचा की सौंदर्य वृद्धि के लिए चने के आटे का प्रयोग हितकारी होता है। 
चने में 27 और 28 फीसदी फॉस्‍फोरस और आयरन होता है। यह न केवल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करते हैं बल्कि हीमोग्‍लोबीन बढा कर किडनियों को भी नमक की अधिकता से साफ करते हैं। एक कटोरा चना खाने से 28 ग्राम रेशा आपके शरीर में जाता है , जिससे पेट संबन्‍धी सारी शिकायते दूर रहती हैं साथ ही कब्‍ज हो या फिर पेट का कैंसर, दोनों ही नहीं होते। 
चने में अंकुरण के 7 दिन बाद तक मिनरल्स और विटामिन्स भर पूर मात्रा में रहते हैं। इन्हें 7 दिनों के अन्दर ही खा लेना अच्छा है। अंकुरित दाने सलाद के रूप में कच्चे या उबाले हुये दोनों तरीके से खाये जा सकते हैं, या आप इनसे अपनी मन पसन्द कोई डिश भी बनाकर खा सकते हैं। सलाद के रूप में कच्चे या उबाले हुये दोनों तरीके से खाये जा सकते हैं।
चने को गरीबों का बादाम कहा जाता है क्योंकि ये सस्ता होता है लेकिन इसी सस्ती चीज में बड़ी से बड़ी बीमारियों की लड़ने की क्षमता है। चने से बालों का गिरना भी रूकता है क्योंकि इसमें मौजूद प्रोटीन बालों को मजबूती प्रदान करते हैं। उबले चने को सिर्फ नमक के साथ मिला कर खाने से आपका वजन भी कम हो सकता है। वैसे भी कहा गया है कि `जो खाये चना वो रहे बना`| 
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भोजन संबन्धी नियम-RULES FOR EATING

भोजन संबन्धी नियम

यदि मनुष्य प्राकृतिक नियमों के अनुसार अपना जीवन यापन करता है तो उसे किसी भी प्रकार के रोग नहीं हो सकते हैं। यह भी सत्य है कि स्वास्थ्य इस संसार में सबसे बड़ा धन होता है। इसे किसी भी कीमत पर कहीं से भी खरीदा नहीं जा सकता है। अपने शरीर को स्वस्थ रखना हमारा धर्म होता है। यदि हम अपने शरीर को स्वस्थ रखते हैं तो हमें सच्चे आनन्द की प्राप्ति होती है।
स्वस्थ रहने के लिए खानपान के कुछ नियमों का पालन करना बहुत ही आवश्यक है। इन नियमों का पालन करके ही व्यक्ति स्वस्थ रह सकता है। जब कोई व्यक्ति खानपान के नियमों के विपरीत भोजन का सेवन करता है तो उसके शरीर में कई प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं जिसके कारण रोगी का स्वास्थ्य दिन प्रतिदिन गिरने लगता है। अत: सभी व्यक्तियों को भोजन संबन्धी नियमों का पालन करना चाहिए।

भोजन संबन्धी कुछ नियम :-
1 सभी व्यक्तियों को भोजन अपनी भूख से कम ही करना चाहिए। भोजन को खूब चबा-चबाकर खाना चाहिए और हमेशा पौष्टिक भोजन करना चाहिए। इस प्रकार का भोजन करने से रोगी व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है।
2 व्यक्तियों को वही भोजन सेवन करना चाहिए जो औषधि के सामान होता है अर्थात वही भोजन करना चाहिए जो शुद्ध हो। कभी भी ऐसा भोजन नहीं करना चाहिए जो दूषित हो तथा शरीर को नुकसान पहुंचाने वाला हो।
3 व्यक्तियों को खाना ऐसा खाना चाहिए जिससे शरीर को लाभ मिलता हो तथा पानी वह पीना चाहिए जो शरीर को निरोगी कर दें।
4 जब तक नवजात शिशु 1 साल का न हो जाए तब तक माता नियमित रूप से स्तनपान अवश्य कराती रहें तथा तब तक अपने आहार का विशेष ध्यान रखें जो सात्विक एवं पौष्टिक हो।

आहार : हमें अपनी रुचि, पाचन क्षमता और आर्थिक स्थिति के अनुसार भोजन करना चाहिए। हमें अपने भोजन में सभी प्रकार के तत्वों को शामिल करना चाहिए।
भोजन संबन्धी 12 महीने के नियमों को अपनाने से व्यक्ति कभी भी बीमार नहीं पड़ता है क्योंकि 12 महीने में कभी ठंड का मौसम होता है तो कभी गर्मी का तो कभी बरसात का मौसम। जब कोई व्यक्ति ठंड के मौसम में अधिक ठंडी चीजों का सेवन करता है तो उसे कई सारे रोग जैसे-सर्दी तथा जुकाम आदि हो जाते हैं। यदि व्यक्ति गर्मी के मौसम में अधिक गर्म चीजों का उपयोग करता है तो उसे दस्त, उल्टी आदि रोग हो जाते हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि मनुष्य 12 महीने में भोजन संबन्धी परहेज करके कई प्रकार के रोगों से बच सकता है।

भोजन संबन्धी बाहर महीने के नियम :-

चैत्र (मार्च-अप्रैल)- चैत्र के महीने में गुड़ का सेवन करना चाहिए जिसके फलस्वरूप कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं। नीम की 4-5 कोमल पत्तियों को सुबह के समय में चेत्र के महीने में चबाने से बहुत अधिक लाभ मिलता है और कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं।
वैशाख (अप्रैल-मई)- इस महीने में तेल का बहुत कम उपयोग करना चाहिए क्योंकि इसके प्रयोग से शरीर में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं। इस महीने में बेल का सेवन बहुत लाभदायक होता है।
ज्येष्ठ (मई-जून)- इस महीने में बहुत अधिक गर्मी होती है इसलिए दोपहर के समय में कुछ घंटे सोना चाहिए। इस महीने में बासी भोजन का सेवन न करें क्योंकि ऐसा करने से शरीर में बहुत से रोग हो सकते हैं।
आषाढ़ (जून-जुलाई) - इस महीने में सभी व्यक्तियों को व्यायाम तथा खेल-कुछ करना चाहिए जिससे बहुत अधिक लाभ मिलता है। इस महीने में बेल का सेवन नहीं करना चाहिए।
श्रावण (जुलाई-अगस्त)- इस महीने में हरी साग-सब्जियों तथा दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। हरड़ का सेवन इस महीने में लाभदायक होता है।
भाद्रपद (अगस्त-सितम्बर)- इस महीने में चीता औषधि का सेवन करना चाहिए।
आश्विन (सितम्बर-अक्तूबर)- इस महीने में गुड़ का सेवन करना लाभदायक होता है लेकिन इस महीने में करेले का सेवन हानिकारक होता है।
कार्तिक (अक्तूबर-नवम्बर)- इस महीने में मटठा पीना हानिकारक होता है। मूली का सेवन इस महीने में लाभदायक होता है।
अगहन:( नवम्बर-दिसम्बर)- इस महीने में व्यायाम करना लाभदायक होता है। इस महीने में अधिक ठंडी तथा गर्म चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
पौष (दिसम्बर-जनवरी)- इस महीने में दूध पीना लाभदायक होता है लेकिन इस महीने में धनिये का सेवन नहीं करना चाहिए।
माघ (जनवरी-फरवरी)- इस महीने में घी का सेवन लाभदयक होता है। मिश्री का सेवन इस महीने में नहीं करना चाहिए।
फाल्गुन (फरवरी-मार्च)- इस महीने में सुबह के समय में स्नान करना लाभदायक होता है। चने का सेवन इस महीने में हानिकारक होता है।
जानकारी-
सभी व्यक्तियों को अपने अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रत्येक महीने में प्रतिदिन सुबह के समय में व्यायाम करना चाहिए तथा दिन में कुछ समय सोना चाहिए। रात के समय में दही का सेवन नहीं करना चाहिए।

ऐेसे खाद्य पदार्थ जिन्हें हम एक साथ नहीं खा सकते

कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनका आपस में कोई तालमेल नहीं, तारतम्य नहीं। जिनको खाने से कोई न कोई रोग,रिएक्शन या आपदा आ सकती है। यह जान लेने के बाद तो भूल करनी ही नहीं चाहिए। आईए। ऐसे बेमेलस विभिन्न पदार्थों को जानें।
1 यदि कोई खिचड़ी खाते समय, साथ ही खीरा भी खा लेगा तो उसे पेट दर्द हो जाना आम बात है।
2 आपको चाय पीनी है तो पीजिए। दूध पीना है तो जरूर पियें। मगर इनसे तुरंत पहले या तुरंत बाद में ठंडी लस्सी या ठंडा पानी न पियें।
3 यदि कोई व्यक्ति अंगूर खा रहा हो तो उसे इसके साथ किसी भी रूप में शहद नहीं सेवन करना चाहिए। वरना पेट दर्द करेगा।
4 आप जान कर चकित होंगे कि दूध और शराब एक साथ लेने से मौत भी हो सकती है। भला फिर क्यों करनी चाहिये ऐसी गलती?
5  कभी भी चावल खाते वक्त, सिरके का सेवन न करें। यदि ऐसी गलती करेंगे तो पेट विकार हो जाएंगे।
6 शहद और घी की समान मात्रा एक साथ खाना बड़ा दुखदायी हो सकता है। इससे ‘फालिस’ रोग होने की सम्भावना रहती है।
7 खरबूजा खा रहे हैं तो दही की कटोरी पास न फटकने दें। एक साथ दोनों का सेवन पेट में दर्द कर देता है।
8  यदि आप कालिक पेन से बचे रहना चाहते हैं तो भूल कर भी पनीर तथा दही एक साथ नहीं खाएं।
9 शहद के साथ खरबूजा खाने की मनाही है। मूली भी शहद के साथ नहीं।
10 यदि आपने लहसुन खाया है या प्याज, फिर दूध नहीं पियें।
11 अरहर की दाल खाई हो तो दूध पीना गड़बड़ी कर देगा।
12 कहते हैं मछली खाने का बाद गन्ने का रस, या फिर दूध पीना अथवा शहद खाना… तीनों अवस्थाएं बड़ी ही खतरनाक होती हैं। इससे त्वचा रोग या फिर कोढ़ हो सकता है।
13 यदि दही खाया हो तो इसके तुरंत बाद, या दही के साथ अंडा अथवा इमली का सेवन कई प्रकार की परेशानी कर सकता है।
14 खटाई खाने के तुरंत बाद शर्बत नहीं पीना चाहिए लस्सी भी नहीं। पेट से जुड़ा कोई रोग हो जाएगा।
15 केले के साथ लस्सी अथवा दही खाना हैजा रोग भी कर सकता है।

16  घी तथा तेल को मिलाकर नहीं खाना चाहिये।

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