अगर आप हिन्दी भाषा के माध्यम से अन्य विदेशी भाषाएँ सीखना चाहते है, तो यह वेबसाइट आपके लिए सबसे बढ़िया शुरुवाती साथी बन सकती है।
यहाँ आप ३५ से ज्यादा विदेशी भाषाओं के लिए अक्षर ज्ञान, अंक, समय वार्तालाप, अभिनन्दन, निवेदन, चीजों के नाम, क्रिया-कलापों के नाम, दैनिक कार्यचर्या के लिए उपयोगी शब्द और वाक्य, भोजन इत्यादि सीख सकते है।
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बिना सॉफ्टवेयर के कंप्यूटर किसी काम का नहीं है। यानि यदि कंप्यूटर पर ब्राउज़र इनस्टॉल न हो तो हम इंटरनेट का प्रयोग नहीं कर पाएंगे, वीडियो प्लेयर सॉफ्टवेयर न हो तो फिल्म नहीं देख पाएंगे, ऑफिस सॉफ्टवेयर न हो तो डॉक्यूमेंट नहीं बना पाएंगे।
इसलिए कंप्यूटर को कार्य में लेने के लिए सही सॉफ्टवेयर का इनस्टॉल किया जाना आवश्यक है, और वे सॉफ्टवेयर यदि मुफ्त हो तो कहना ही क्या।
कहाँ करें मुफ्त डाउनलोड
निम्न वेबसाइट के माध्यम से आप अपने कंप्यूटर पर ईमेल, प्रोग्रामिंग, ज्ञानार्जन, कंप्यूटर टूल, डॉक्यूमेंट, मल्टीमीडिया, वीडियो टूल, डाउनलोड मैनेजर, डिज़ाइन, ऑपरेटिंग सिस्टम, गेम इत्यादि जैसे कई सॉफ्टवेयर मुफ्त डाउनलोड कर सकते है: इन वेबसाइट पर जाएँ:
यदि आपके कंप्यूटर पर ग़लती से कोई फाइल, फोटो इत्यादि डिलीट हो गए है, तो "फाइल रिकवरी सॉफ्टवेयर" की सहायता से आप उन फाइलों को पुनः प्राप्त कर सकते है।
कंप्यूटर फाइल डिलीट के प्रकार
कंप्यूटर पर कोई भी फाइल दो प्रकार से डिलीट की जा सकती है - "सामान्य डिलीट" और "स्थायी डिलीट" ।
सामान्य डिलीट में फाइल आपके कंप्यूटर के "रीसायकल बिन" में चली जाती है, जहाँ से आप फाइल को फिर से उसके मूल फोल्डर में भेज सकते है। लेकिन स्थायी डिलीट के बाद आपके पास खुद से फाइल को पुनः प्राप्त करने का कोई रास्ता नहीं होता।
स्थायी डिलीट फाइल के लिए फाइल रिकवरी सॉफ्टवेयर
ऐसी ग़लती से स्थायी डिलीट हुई फाइल को वापस पाने के लिए फाइल रिकवरी सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है।
ऐसे ही एक सॉफ्टवेयर को आप निम्न वेबसाइट से मुफ्त डाउनलोड कर सकते हो: click here to download
१. अपने एंड्राइड मोबाइल फ़ोन की सेटिंग्स (Settings) में जाएँ, और 'More..' पर क्लिक करें
२. फिर 'Tethering & Portable hotspot' पर क्लिक करें
३. फिर 'Set up Wi-Fi hotspot' पर क्लिक करें
४. अगले स्क्रीन पर अपने नेटवर्क का नाम दें, यदि आप इस नेटवर्क पर पासवर्ड नहीं रखना चाहते तो 'Security' में 'None' चुन लें अन्यथा नेटवर्क से जुड़ने के लिए पासवर्ड सेट करें.
५. फिर 'Save' पर क्लिक कर लें
६. इसके बाद 'PortableWi-Fi hotspot' के सामने 'चेकबॉक्स' पर क्लिक करके उसे 'ऑन' करें
७. आपको स्क्रीन के ऊपर मेसेज आएगा कि 'Thethering hotspot active' यानि चालू हो गया है|
८.इसके बाद आप अपने कंप्यूटर में जाकर 'वाई-फाई' नेटवर्क ऑन करें, आप पाएंगे कि एंड्राइड मोबाइल पर बनाया नेटवर्क कंप्यूटर में दिखा रहा है|
९. इस नेटवर्क से अपने कंप्यूटर को जोड़ें, इसमें 'Connect' पर क्लिक करें, यदि आपने एंड्राइड में पासवर्ड सेट किया है तो वही पासवर्ड यहाँ भी डालें|
१०. इससे आपका कंप्यूटर आपके मोबाइल पर चालू इन्टरनेट से जुड़ जायेगा|
जैस-जैसे मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल में बढ़ोतरी हुई है, वैसे-वैसे हैकर्स की दिलचस्पी भी मोबाइल फ़ोन की तरफ़ बढ़ी है.
आईडीसी के मुताबिक़ 2014 की तीसरी तिमाही में विश्व में बिकने वाले 80 प्रतिशत से अधिक फ़ोन एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम (ओएस) पर आधारित हैं.
विश्व का सबसे लोकप्रिय ओएस होने के कारण, हाल के वर्षों में यह हैकर्स की दिलचस्पी की वजह बना.
यदि आप लाखों भारतीयों की तरह एंड्राइड फ़ोन रख़ते हैं, तो बीबीसी आपके लिए लेकर आ रहा है एंड्राइड फ़ोन पर ख़ास जानकारी– क्या है हैकिंग और कैसे सुरक्षित रखें अपना फ़ोन और निजी डाटा?
हैकर्स की पसंद क्यों?
रूस की साइबर सुरक्षा कंपनी कैस्परस्की की मानें तो हैकिंग के बारे में सोचने से पहले हैकर्स तीन बातों पर ध्यान देते हैं– (1) ज़्यादातर लोग कौन-सा ओएस इस्तेमाल करते हैं (2) ओएस के प्रोग्राम संबंधित दस्तावेज़ उपलब्ध हैं या नहीं (3) इसमें कुछ कमियां हैं या नहीं.
सिमेंटिक सिक्युरिटी थ्रेट रिपोर्ट 2014 के अनुसार एंड्राइड मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वालों को ऐप डाउनलोड करने और इंस्टॉल करने की अधिक आज़ादी देता है. इस वजह से भी हैकर्स की इस फ्री ओएस में दिलचस्पी बढ़ी है.
चिंता का विषय क्यों?
हैकिंग का इस्तेमाल कई बार बैंक अकाउंट से पैसे चुराने, किसी व्यक्ति या सरकार-संबंधी डाटा, या निजी डाटा चुराकर बेचने में होता है. इस कारण यह साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता का विषय बना हुआ है.
मोबाइल सुरक्षा कंपनी कूलस्पैन के सीईओ ग्रेग स्मिथ ने 2013 में फोर्ब्स को बताया कि एंड्राइड के कुछ विशेषताओं को हैक करना आसान है- जैसे कैमरा और माइक. चिंता की बात यह है कि ऐसे हैकिंग टूल आसानी से ऑनलाइन उपलब्ध हैं.
2013 की सिमेंटेक की एक रिपोर्ट के अनुसार ऐसे सॉफ्टवेयर मुफ़्त मिलते हैं. इसके ज़रिए दूसरे टूल का इस्तेमाल कर उपभोक्ता को ठगने के लिए, नया मैलवेयर तैयार करना आसान होता है जो असली ऐप की तरह दिखता हो.
कैसे ऐप से है ख़तरा?
भारतीय कंप्यूटर इमर्जेंसी रिस्पांस टीम (सर्ट-इन) के महानिदेशक डॉ गुलशन रॉय के मुताबिक़ एंड्राइड ऐप्स जो आपके एसएमएस पढ़ सकें, आपके ख़र्चे पर दूसरों को प्रीमियम एसएमएस भेज सकें और आपका डाटा चुरा सकें, खतरनाक हैं.
इनकी संख्या बढ़ रही है. अपराधी ऐसे बैंकिंग ट्रॉज़न ऐप भी बना रहे हैं जो आपके फ़ोन से बैंक पासवर्ड जैसी जानकारी चुरा सकते हैं.
डॉ रॉय का कहना है कि हाल के दौर में ऑनलाइन स्टोर, वेबसाइटों, ऑनलाइन फोरम और सोशल मीडिया में आए उछाल से ग़लत मोबाइल ऐप्स को बढ़ावा मिला है.
साइबर अपराधियों ने ऐसे तरीके ख़ोज निकाले हैं, जिससे वे उपभोक्ताओं को प्रेरित करते हैं कि वे मैलवेयर वाला ऐप डाउनलोड करें.
सुरक्षा विशेषज्ञ अजिन अब्राहम का कहना है कि फ्री और अश्लील वीडियो वाले ऐप फ़ोन उपभोक्ताओं को बड़ी आसानी से लुभा लेते हैं.
अब्राहम कहते हैं, ऐसे भी मैलवेयर हैं जो कंपनियों पर ख़ास हमला करने के लिए बनाए जाते हैं. कई ऐप सरकार-समर्थित हमले का हिस्सा हो सकती हैं.
8 सावधानियां
1. ‘कुछ भी’ न कर लें डाउनलोड
कोई भी ऐप डाउनलोड करते वक़्त ध्यान रखें कि आप सही वेबसाइट और कंपनी का ऐप ही डाउनलोड करें.
जब कोई ख़ास ऐप लांच होता है, हममें से कई उसे तुरंत डाउनलोड कर लेते हैं. इसका फ़ायदा उठाते हुए हैकर्स मिलते-जुलते नाम वाले मैलवेयर मुहैया कराते हैं, जिसे कई लोग ग़लती से डाउनलोड भी कर लेते हैं. आपको पता भी नहीं चलता कि कोई तीसरा फ़ोन के ज़रिए उसकी गतिविधियों की जानकारी पा रहा है.
2. ग़ौर से पढ़ें परमिशन पेज
सेंटर फॉर इंटरनेट एंड सोसाइटी के पॉलिसी डाइरेक्टर प्राणेश प्रकाश के अनुसार ज़रूरी है कि आप ऐप इंस्टॉल करने से पहले उसका परमिशन पेज पढ़ें.
यदि कोई ऐप आपकी फ़ोनबुक पढ़ने की इजाज़त जैसी ज़रूरत से ज़्यादा परमिशन मांगता है, तो इसे इंस्टॉल न करें.
प्रकाश की राय है कि फ्री और ओपन सोर्स ओएस का इस्तेमाल करना सही होता है. अन्य प्रकार के ओएस में सुरक्षा दावों की पुष्टि कर पाना आसान नहीं होता.
3. ज़रूर लें बैकअप
डॉ रॉय का कहना है कि फ़ोन डाटा का बैकअप लेना बेहद ज़रूरी है. आखिर अपने डाटा की सुरक्षा आपकी भी ज़िम्मेदारी है.
4. गूगल-फ्री एंड्राइड के बारे में सोचें
स्वतंत्र रिसर्चर और तकनीकी सलाहकार विक्रम कृष्णा के अनुसार उपभोक्ता वाकिफ़ नहीं होते कि एंड्राइड फ़ोन खरीदने पर वे गूगल के साथ क़रार में बंध जाते हैं.
किसी भी प्रकार के थर्ड पार्टी ऐप्स इंस्टॉल नहीं कर पाना उपभोक्ता की प्राइवेसी रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम होता है. मगर थर्ड पार्टी ऐप्स इंस्टॉल करना एंड्राइड में आसान होता है.
ऐसे में गूगल के साथ बिना बंधे सुरक्षित रूप से एंड्राइड फ़ोन के इस्तेमाल के तरीकों को देखा जा सकता है, जैसे- साइनोजेन मॉड, एफ़-ड्राइड, रेप्लिकैन्ट और दूसरे फॉस ओएस.
5. अपडेट ज़रूर इस्तेमाल करें
कृष्णा कहते हैं कि कोई भी सॉफ़्टवेयर एक दिन में नहीं बनता, उसे बार-बार टेस्ट करने की दरकार होती है. इसके बावजूद इसमें कमज़ोरियों की संभावनाएं बनी रहती हैं.
जैसे-जैसे कंपनी को इनकी जानकारी मिलती रहती है, कंपनी अपडेट जारी करती है. इन्हें ज़रूर डाउनलोड कर इंस्टॉल करें. अपडेट हमेशा मुफ़्त होते हैं.
अब्राहम कहते हैं कि एंड्राइड के विभिन्न वर्ज़न को देखें तो पुराने ओएस की तुलना में गूगल का ताज़ा 5.0 लॉलीपॉप काफ़ी सुरक्षित है. कई एंड्राइड फ़ोन कंपनियां अपडेट जारी नहीं करती, जिससे सीधे उपभोक्ता की सुरक्षा ख़तरे में आ जाती है.
6. एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल करें
अपने फ़ोन पर फुल डिवाइस एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल करें. हाल ही में लांच सैमसंग, एलजी, एचटीसी, एपल और ब्लैकबैरी स्मार्टफ़ोन (एपल और ब्लैकबैरी एंड्राइड का इस्तेमाल नहीं करते) में इस तरह की सुविधा है.
यदि आपके एंड्राइड फ़ोन पर ऐसी सुविधा नहीं है तो एन्क्रिप्शन ऐप का इस्तेमाल करें.
7. असुरक्षित वाई-फ़ाई से बचें
आजकल आपको कई जगह वाई-फ़ाई नेटवर्क की सुविधा मिलती है पर ऐसे वाई-फ़ाई नेटवर्क से बचें जिनके सुरक्षित होने के बारे में आपको सही जानकारी न हो.
संवेदनशील डाटा जैसे बैंक अकाउंट नंबर, क्रेडिट कार्ड पासवर्ड पब्लिक वाई-फ़ाई पर कभी शेयर न करें.
8. एंटी-वायरस ज़रूर रखें
कहने की ज़रूरत नहीं कि इंटरनेट का इस्तेमाल करने पर फ़ोन सुरक्षित रहे इसके लिए एंटी-वायरस ज़रूर रखें. समय-समय पर इसे अपडेट करते रहें ताकि आपका एंटी-वायरस नए ख़तरों से लड़ने को तैयार रहे.