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गुरुवार, 10 दिसंबर 2015

ऐप जो ज़्यादा मेमोरी खाते हैं?

हालांकि स्मार्टफोन के सभी ऐप बैटरी के दुश्मन नहीं होते हैं लेकिन अगर आप स्मार्टफोन पर गेमिंग के शौक़ीन हैं तो गेमिंग और वीडियो चलाने वाले ऐप बैटरी पर सबसे ज़्यादा ज़ोर डालते हैं.
एंड्रॉयड मार्शमैलौ पर आप अपने 'रैम' और मेमोरी पर नज़र रख सकते हैं ताकि बैटरी की लाइफ़ ज़्यादा से ज़्यादा हो सके.
'रैम' पर नज़र रखने के लिए आप कुछ बातों का ध्यान रखें.
सबसे पहले 'सेटिंग' में जाकर जहां 'मेमोरी' लिखा है उसपर टैप कीजिये. उससे आपको पता लगेगा कि आपके एंड्रॉयड डिवाइस पर कितना 'रैम' बचा है और कितना इस्तेमाल हो रहा है.
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उसके बाद आपको 'मेमोरी यूज़्ड बाई ऐप' पर टैप करना होगा. इससे आप वो सभी ऐप देख पाएंगे जो आपकी डिवाइस पर काम कर रहे हैं. ड्राप डाउन मेनू में आपको उन सभी ऐप के बारे में जानकारी मिलेगी जिसने पिछले चौबीस घंटे में 'रैम' इस्तेमाल किया है.
उसके बाद आपको ये पता लगेगा कि कौन से ऐप को सबसे ज़्यादा 'रैम' की ज़रूरत है.
ये जानने के बाद आप ये तय कर सकते हैं कि कौन से ऐप आपके लिए ज़रूरी हैं और जो ज़्यादा 'रैम' भी इस्तेमाल कर रहे हों.
और क्या आप उनको रखना चाहते हैं या नहीं?
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वाई-फ़ाई से 100 गुना तेज़ है लाई-फ़ाई

Image result for lifi logoअब डेटा ट्रांसफर के लिए ऐसी तकनीक आ चुकी है जो वाई-फ़ाई के मुक़ाबले 100 गुना तेज़ है.
और इस तकनीक को विकसित करने वाले हैं भारतीय तकनीशियन. लाई-फ़ाई का इसी सप्ताह एस्तोनिया के टालिन में परीक्षण किया गया.
लाई-फ़ाई से वाई-फ़ाई के मुक़ाबले आप 100 गुना तेज़ इंटरनेट चला सकते हैं और इसकी रफ़्तार एक गीगाबिट प्रति सेकेंड तक हो सकती है.
स्टार्टअप कंपनी वेलमेनी के सह संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपक सोलंकी ने बीबीसी को बताया कि यह तकनीक कॉल ड्रॉप जैसी समस्याओं के लिए रामबाण साबित हो सकती है.
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Image result for lifi logoसोलंकी ने बताया कि उनकी कंपनी एस्तोनिया में पंजीकृत है लेकिन इसकी पूरी टीम भारतीय है.
यह पूछने पर कि क्या उन्हें भारत में कोई निवेशक नहीं मिला, सोलंकी कहते हैं कि ढाई साल पहले उन्होंने कोशिश की थी लेकिन यहां निवेशकों ने इसे कपोल कल्पना बताकर नकार दिया था.
लाई-फ़ाई चलाने के लिए आपको चाहिए बिजली का एक स्रोत जैसे एलईडी बल्ब, इंटरनेट कनेक्शन और एक फ़ोटो डिटेक्टर.
वेलमेनी ने एक गीगाबिट प्रति सेकेंड की रफ़्तार से डेटा भेजने के लिए एक लाई-फ़ाई बल्ब का इस्तेमाल किया. परीक्षण में पता चला कि सैद्धांतिक तौर पर यह रफ़्तार 224 गीगाबिट प्रति सेकेंड तक हो सकती है.
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यह परीक्षण एक ऑफ़िस में किया गया ताकि कर्मचारी इंटरनेट चला सकें. साथ ही एक औद्योगिक क्षेत्र में भी इसका परीक्षण हुआ जहां इसने एक स्मार्ट लाइटिंग सॉल्यूशन मुहैया कराया.
सोलंकी के मुताबिक़ यह तकनीक तीन से चार साल में उपभोक्ताओं तक पहुंच जाएगी.
उन्होंने कहा कि लाई-फ़ाई के इस्तेमाल के लिए मोबाइल पर एक डिवाइस लगानी होगी पर भविष्य में यह वाई-फ़ाई और ब्लूटूथ की तरह मोबाइल में ही इनबिल्ट होगी.
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जहां रेडियो तरंगों के लिए स्पेक्ट्रम की सीमा है, वहीं विज़िबल लाइट स्पेक्ट्रम 10,000 गुना ज़्यादा व्यापक है. इसका मतलब यह है कि इसकी निकट भविष्य में खत्म होने की संभावना नहीं है.
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इसमें सूचना को लाइट पल्सेज़ में एन्कोड किया जा सकता है जैसे रिमोट कंट्रोल में होता है.
एलईडी ब्रॉडबैंड कनेक्शन के लिए पर्याप्त डेटा ट्रांसमिट करने में सक्षम है और फिर भी यह सामान्य दूधिया रोशनी की तरह दिखता है.
लाई-फ़ाई शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले एडिनबरा विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर हेराल्ड हास ने किया था. उन्होंने 2011 में टैड (टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट एंड डिजाइन) कांफ्रेंस में इसका प्रदर्शन किया था.
उन्होंने एक एलईडी बल्ब से वीडियो भेजकर दिखाया था. उनकी प्रस्तुति को क़रीब 20 लाख बार देखा जा चुका है.
प्रोफ़ेसर हास ने ऐसे भविष्य की कल्पना की थी जब बिजली के अरबों बल्ब वायरलैस हॉटस्पॉट बन जाएंगे.
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लाई-फ़ाई का बड़ा लाभ यह है कि यह वाईफ़ाई की तरह दूसरे रेडियो सिग्नल में खलल नहीं डालता. यही कारण है कि इसका इस्तेमाल विमानों और दूसरे ऐसे स्थानों पर किया जा सकता है.
लेकिन इस तकनीक की कुछ खामियां भी हैं. इसकी सबसे बड़ी खामी यह है कि इसे घर के बाहर धूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि सूर्य की किरणें इसके सिग्नल में दखल देती हैं.
यह तकनीक दीवार के आरपार इस्तेमाल नहीं की जा सकती. इस तरह शुरुआत में यह वाई-फ़ाई नेटवर्क के पूरक के रूप में काम करेगी.
संकरे शहरी इलाक़ों या अस्पताल जैसी जगहों पर जहां वाई-फ़ाई सुरक्षित नहीं है, इसका उपयोग हो सकता है.
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स्मार्टफोन पर एंटी-वायरस होना ज़रूरी है क्या?

Image result for smartphone antivirus logoअपने स्मार्टफोन के लिए एंटी-वायरस इस्तेमाल करना ज़रूरी है क्या?
चूंकि आपके स्मार्टफोन में काफी अहम जानकारी रखी होती है इसलिए कई लोगों का मानना है कि वायरस से बचना बहुत ज़रूरी है.
इससे आपका डेटा सुरक्षित रहता है, आप हैकर से बच सकते हैं और अगर कोई ऐप आपके बारे में ज़्यादा जानकारी लेने की कोशिश करता है तो उस पर भी आपकी नज़र हो सकती है.
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आइए आपको 4 एंटी-वायरस ऐप के बारे में बताते हैं जो उनके दुश्मन हो सकते हैं जो आपके डेटा पर नज़र गड़ाए हुए होंगे.
अवास्ट मोबाइल सिक्योरिटी और एंटी वायरस आप मुफ्त डाउनलोड तो कर सकते हैं लेकिन अगर इसके सभी फीचर इस्तेमाल करना चाहेंगे तो उसके लिए करीब 1,000 रुपये सालाना का खर्च आएगा.
लेकिन सभी एंटी-वायरस के फीचर इस्तेमाल करने के लिए ये फ्री है.
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आपके सभी ऐप, SD कार्ड और सिस्टम सेटिंग को ये स्कैन कर लेता है. इसको इनस्टॉल करने के बाद जब भी आप कोई ऐप डाउनलोड करेंगे तो ये मैलवेयर के लिए भी स्कैन कर लिया जाएगा.
एवीजी एंटी-वायरस में वायरस से बचने के अलावा एक टास्क किलर और डेटा यूसेज मॉनिटर नाम का फीचर है.
इसकी मदद से आप किसी भी बड़ी फाइल के डाउनलोड पर नज़र रख सकते हैं. अगर आप किसी ऐसे वेबसाइट पर चले गए हैं जो एक फिशिंग वेबसाइट है तो उसके बारे में आपको जानकारी ये ऐप इस्तेमाल करने पर मिलेगी.
वायरस के इसके सभी फीचर फ्री है लेकिन अगर आपको दूसरे फीचर भी चाहिए तो इसके लिए सालाना करीब 1,000 रुपये खर्च करने होंगे.
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अगर आप कैस्परस्की के ऐप का इस्तेमाल करना चाहते हैं और आपका फ़ोन खो जाता है तो इस ऐप का इस्तेमाल करके आप उसे लॉक या उसके सभी डेटा को मिटा सकते हैं.
एंड्राएड 4.4 या उसके बाद के ऑपरेटिंग सिस्टम इस्तेमाल करने वालों के लिए ऐसे स्मार्टफोन पर कॉल और एसएमएस को भी ब्लॉक किया जा सकता है.
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दूसरे एंटी-वायरस ऐप की तरह इसके भी सभी फीचर के लिए आपको करीब 1,000 रुपये सालाना खर्च करना होगा.
अगर कोई ऐप आपके स्मार्टफोन से काफी ज़्यादा परमिशन मांगता है तो मैकेफ़ी का ऐप उस पर नज़र रखता है.
इसके वायरस के लिए स्कैन को आप खुद कर सकते हैं और अगर ज़रूरत है तो अपनी कांटेक्ट लिस्ट और एसएमएस का बैकअप भी ले सकते हैं.
बैटरी ऑप्टिमाइज़रImage copyrightThinkstock
इस ऐप में एक बैटरी ऑप्टिमाइज़र है जिसकी मदद से ज़्यादा बैटरी खाने वाले ऐप को बंद भी किया जा सकता है.
दूसरे एंटी-वायरस ऐप की तरह इसके भी सभी फीचर को इस्तेमाल करने के लिए आपको करीब 2,000 रुपये सालाना खर्च करने होगा. इस पैसे में आपको दो गीगाबाइट का क्लाउड स्टोरेज भी मिलता है.
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मोबाइल से लैपटॉप में कैसे चलाएं इंटरनेट ?

Image result for mobile to pc internet logoमोबाइल की तरह अब लैपटॉप भी एक ऐसा गैजेट बन चुका है जिसे ज्‍यादातर लोग अपने साथ कैरी करते हैं फिर वो चाहे प्रोफेशनल हो या फिर स्‍टूडेंट, जब भी हम लैपटॉप को ऑफिस, कालेज या फिर घर में प्रयोग करते हैं उसमें इंटरनेट कनेक्‍ट करने के लिए कई साधन होते हैं जैसे ब्रॉडबैंड कनेक्‍शन, वाई-फाई सपोर्ट, लेकिन दोस्‍तों कभी कभी हम ऐसी जगह होते हैं जहां पर न तो वाईफाई होता है और न ही ब्रांडबैंड अब आप सोंच रहें होंगे आजकल तो कई कंपनियों के डॉगल बाजार में मिल रहे हैं उनकी मदद से लैपटॉप में आसानी से इंटरनेट एक्‍सेस कर सकते हैं।
लेकिन जब आपके पास मोबाइल फोन है तो बेकार में इंटरनेट के लिए अलग से डॉगल लेने की कोई जरूरत नहीं, मोबाइल से लैपटॉप में इंटरनेट कनेक्‍ट करने के कई तरीके है जैसे डेटा केबल द्वारा, ब्‍लूटूथ द्वारा , मोबाइल हॉट स्‍पॉट या फिर वाईफाई की मदद,
इंटरनेट कनेक्‍ट करने से पहले ध्‍यान रहें- जरूरी नहीं इसके लिए आपके पास कोई महंगा स्‍मार्टफोन हो बस आपके फोन में जीपीआरएस कनेक्‍टीविटी एक्‍टीवेट होनी चाहिए यानी आपके मोबाइल फोन में इंटरनेट एक्‍टीवेट हो।
[alert-announce]ब्‍लूटूथ की मदद से कैसे कनेक्‍ट करें इंटरनेट[/alert-announce]
  1. सबसे पहले अपने फोन में ब्‍लूटूथ को ऑन कर दें। इसके लिए सेटिंग में जाकर कनेक्‍टीविटी ऑप्‍श्‍ान के अंदर ब्‍लूटूथ ऑप्‍शन ऑन करें।
  2. अब अपने लैपटॉप के स्‍टार्ट मीनू में क्लिक करें और डिवाइसेस एंड प्रिंटर (Devices and Printers) ऑप्‍शन चुनें।
  3. डिवाइसेस एंड प्रिंटर ऑप्‍श्‍ान चुनने के बाद ऊपर दिए गए मीनू में एड ए डिवाइस ऑप्‍शन पर क्लिक करें, ऑप्‍शन पर क्लिक करते ही कंप्‍यूटर आपके फोन को सर्च करने लगेगा।
  4. जब आपके फोन मॉडल, नंबर या फिर आपके फोन में सेव ब्‍लूटूथ नेम सर्च में दिखने लगे तो उसे सलेक्‍ट करें और नेक्‍स्‍ट बटन पर क्लिक कर दें।
  5. नेक्‍स्‍ट बटन पर क्लिक करते ही आपका फोन लैपटॉप के साथ पेयर हो जाएगा, हां इस बीच लैपटॉप और फोन में कनेक्‍शन के लिए एक वेरिफिकेशन कोड भी आपको लिखना पड़ेगा जो दोनों डिवाइसेस को आपस में कनेक्‍ट कर देगा इसलिए दोनों में एक ही कोड नंबर डालें।
  6. अब आप पीसी में बने फोन आइकॉन में डबल क्लिक करें और “Use your phone to connect to the Internet”ऑप्‍शन पर जाकर कनेक्‍ट बटन पर क्लिक कर दें। कनेक्‍ट बटन पर क्लिक करते ही फोन पर भी कनेक्‍शन की रिक्‍वेस्‍ट एक्‍सेप्‍ट कर लें। अब आप अपने लैपटॉप में इंटरनेट का प्रयोग कर सकते हैं।
  7. डेटा केबल के मुकाबले ब्‍लूटूथ से पीसी में इंटरनेट कनेक्‍शन थोड़ा स्‍लो हो सकता है।
डेटा केबल की मदद से कैसे कनेक्‍ट करें इंटरनेट
  1. डेटा केबल से लैपटॉप  में इंटरनेट कनेक्‍ट करने के लिए सबसे पहले अपने लैपटॉप में मोबाइल सॉफ्टवेयर डाउनलोड करें। उदाहरण: अगर आपके पास नोकिया का फोन हैं तो पीसी में नोकिया पीसी सूट इंस्‍टॉल करें यें नेकिया की साइट में बिल्‍कुल फ्री उपलब्‍ध है।
  2. सॉफ्टवेयर इंस्‍टॉल होने के बाद अपने फोन को डेटा केबल से लैपटॉप में कनेक्‍ट करें।
  3. मोबाइल कनेक्‍ट करते ही लैपटॉप में सेब मोबाइल सॉफ्टवेयर को ओपेन करें।
  4. सॉफ्टवेयर में “connect to Internet” ऑप्‍शन दिखेगा।
  5. लेकिन इससे पहले सॉफ्टवेयर में सभी सेटिंग कर लें जैसे कंट्री, भाषा सर्विस प्रोवाइडर
  6. “connect to Internet” ऑप्‍शन क्लिक करते ही आपका मोबाइल पीसी से कनेक्‍ट हो जाएगा
मोबइल फोन से इंटरनेट यूज करने के दौरान आपके फोन की बैटरी भी कंज्‍यूम होती है इसलिए अपने फोन को फुल चार्ज रखें।
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